Saturday, 24 August 2019

Modi's attack on UAE land 370, said - this article was the cause of terrorism

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक इंटरव्यू में कहा कि भारत 4 दशक से सीमा पार आतंकवाद की मार झेल रहा है. भारत और यूएई का यह सामान्य हित है कि जो ताकतें मानवता के खिलाफ काम कर रही हैं और आतंकवाद को पनाह दे रही हैं, उन्हें अपनी नीतियां छोड़नी होंगी. 


पीएम बोले-4 दशकों से सीमा पार आतंकवाद की मार झेल रहा है भारत 

पीएम मोदी बोले-भारतीय अर्थव्यवस्था की जड़ें बेहद मजबूत 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक इंटरव्यू में कहा कि भारत 4 दशक से सीमा पार आतंकवाद की मार झेल रहा है. भारत और यूएई का यह सामान्य हित है कि जो ताकतें मानवता के खिलाफ काम कर रही हैं और आतंकवाद को पनाह दे रही हैं, उन्हें अपनी नीतियां छोड़नी होंगी. पीएम मोदी ने खलीज टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि हमने आतंकवाद के खिलाफ जो कदम उठाए हैं, यूएई ने उन्हें समझा है. साझा सुरक्षा को लेकर हमारा जबरदस्त सहयोग है. 

पीएम मोदी ने कहा कि जहां तक आर्टिकल 370 की बात है तो हमारे आंतरिक कदम पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी हैं. इन्हें जम्मू-कश्मीर का अकेलापन दूर करने के लिए लाया गया है, जिससे वह विकसित नहीं हो पाया और कुछ लोगों के हितों को उससे फायदा होता था. इस अकेलेपन के कारण कई युवा बहक गए और आतंकवाद व हिंसा का रास्ता अपना लिया. पीएम ने कहा, हम इन प्रवृत्तियों को अपने समाज में कोई पैर जमाने नहीं दे सकते और हमें पूरे देश के विकास और प्राथमिक कार्यों से विचलित कर सकते हैं. 

इंटरव्यू में पीएम मोदी से पूछा गया कि अमेरिका में अगले साल तक आर्थिक मंदी की आशंका है, जिसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है. क्या आप मानते हैं कि भारत और यूएई की आर्थिक साझेदारी इस बुरे वक्त से पार पा जाएगी. इस संबंध में आप क्या कदम उठाना चाहते हैं? 

जवाब में मोदी ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूत है. अगले 5 वर्षों में हमने 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने का लक्ष्य रखा है. यूएई अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता ला रहा है और अपनी ताकत के पारंपरिक क्षेत्रों से परे जा रहा है.साथ में, हमारे पास समृद्धि हासिल करने के लिए सोच, रोडमैप के साथ-साथ आकार, गति व संसाधन हैं. यह हम दोनों और दुनिया के लिए जीत की स्थिति है. हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती तालमेल और संयुक्त अरब अमीरात में लाखों भारतीयों की उपस्थिति का उपयोग करते हुए एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं.


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